सनातन धर्म में एकादशी तिथि का विशेष स्थान है। प्रत्येक एकादशी भगवान श्री विष्णु की उपासना तथा उनकी कृपा प्राप्त करने का अवसर प्रदान करती है, किंतु विजया एकादशी का महत्व कुछ अलग और विशेष माना गया है। यह एकादशी न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण है, बल्कि जीवन में संघर्ष कर रहे प्रत्येक व्यक्ति के लिए आशा और विश्वास का दीप जलाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार विजया एकादशी का धार्मिक महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, जब भगवान श्रीराम लंका पर चढ़ाई करने की तैयारी कर रहे थे, तब उनके समक्ष अनेक बाधाएँ थीं। समुद्र पार करना एक बड़ी चुनौती थी और युद्ध का परिणाम अनिश्चित था। ऐसे समय में श्रीराम ने ऋषि-मुनियों से मार्गदर्शन मांगा।
तब ऋषियों ने उन्हें फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी, अर्थात विजया एकादशी का व्रत करने का विधान बताया। ऋषियों ने कहा कि यह व्रत करने से व्यक्ति को अपने उद्देश्य में अवश्य ही विजय प्राप्त होती है और सभी विघ्न दूर होते हैं।
भगवान श्रीराम ने विधिपूर्वक विजया एकादशी का व्रत किया, भगवान श्री विष्णु की आराधना की और उनका स्मरण किया। इस व्रत के प्रभाव से न केवल समुद्र पार करने का मार्ग प्रशस्त हुआ, बल्कि अंततः अधर्म पर धर्म की विजय भी हुई।
इसी कारण इस एकादशी को विजया एकादशी कहा गया, अर्थात ऐसी एकादशी जो भक्त को हर प्रकार की बाधाओं पर विजय दिलाती है।
पौराणिक कथा के अनुसार विजया एकादशी का आध्यात्मिक महत्व
पौराणिक कथा यह संदेश देती है कि केवल शक्ति या पराक्रम ही नहीं,बल्कि भगवान में अटूट विश्वास, संयम और साधना ही सच्ची विजय का मार्ग है। विजया एकादशी का व्रत मनुष्य को यह सिखाता है कि जब जीवन में मार्ग कठिन हो,जब निर्णय लेना कठिन लगे, तब भगवान विष्णु की शरण में जाकर धैर्य और श्रद्धा के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
हिन्दू धर्म के अनुसार विजया एकादशी व्रत की विधि
विजया एकादशी का व्रत फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को किया जाता है। इस दिन भगवान श्री विष्णु की विशेष पूजा का विधान है। शास्त्रों में वर्णित विधि के अनुसार यदि श्रद्धा और नियमपूर्वक यह व्रत किया जाए, तो इसका फल शीघ्र प्राप्त होता है। व्रत के दिन प्रातः ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करना उत्तम माना गया है। स्नान के पश्चात स्वच्छ एवं सात्त्विक वस्त्र धारण करें। इसके बाद घर के पूजा स्थल को साफ कर भगवान श्री विष्णु का ध्यान करें। पूजा के समय भगवान विष्णु को,
तुलसी दल,
पीले पुष्प,
चंदन,
धूप और दीप अर्पित करें। इसके बाद श्रद्धा भाव से भगवान विष्णु के मंत्र
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥”
का जप करें। मंत्र का जप तुलसी की माला से कम से कम 108 बार करना शुभ माना गया है।
व्रत के दिन अन्न, चावल, दाल और तामसिक भोजन का त्याग किया जाता है। भक्त अपनी श्रद्धा और शारीरिक क्षमता के अनुसार निर्जल या फलाहार व्रत रख सकते हैं। विजया एकादशी के दिन मन, वाणी और कर्म से शुद्धता बनाए रखना आवश्यक माना गया है।
द्वादशी तिथि के दिन प्रातःकाल भगवान विष्णु की पूजा कर व्रत का पारण किया जाता है। पारण के समय सात्त्विक भोजन ग्रहण करना चाहिए।
विजया एकादशी व्रत करने से क्या फल मिलता है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार विजया एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इस व्रत के प्रभाव से व्यक्ति को जीवन के अनेक क्षेत्रों में सकारात्मक परिवर्तन अनुभव होते हैं।
यह व्रत करने से
1. कार्यों में आ रही बाधाएँ दूर होती हैं
2. शत्रुओं और विपरीत परिस्थितियों पर विजय प्राप्त होती है
3.मनोबल और आत्मविश्वास में वृद्धि होती है
शास्त्रों में यह भी कहा गया है कि विजया एकादशी का व्रत करने से पूर्व जन्मों के पाप कर्मों का शमन होता है और भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
यह व्रत केवल भौतिक सफलता तक सीमित नहीं है, बल्कि व्यक्ति को आंतरिक शांति, संयम और आध्यात्मिक बल भी प्रदान करता है। जीवन में जब मार्ग कठिन प्रतीत हो, तब यह व्रत भक्त को सही दिशा और धैर्य प्रदान करता है।
विजया एकादशी का व्रत केवल एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, संयम और आत्मबल की साधना है। यह व्रत हमें यह स्मरण कराता है कि जीवन की प्रत्येक चुनौती में केवल बाहरी प्रयास ही नहीं, बल्कि ईश्वर में दृढ़ विश्वास भी आवश्यक होता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस व्रत की शक्ति से भगवान श्रीराम को भी अपने उद्देश्य में विजय प्राप्त हुई। यही कारण है कि विजया एकादशी को विजय प्रदान करने वाली एकादशी कहा गया है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत मनुष्य को मानसिक शांति, धैर्य और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करता है।
भगवान श्री विष्णु की कृपा से यह व्रत भक्त के जीवन से नकारात्मकता को दूर करता है और उसे धर्म, सत्य तथा सदाचार के मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।
अतः जो भी व्यक्ति अपने जीवन में सफलता, शांति और संतुलन की कामना करता है, उसके लिए विजया एकादशी का व्रत अत्यंत कल्याणकारी माना गया है।
