भगवान सत्यनारायण जी की आरती का महत्व बहुत गहरा और पवित्र माना गया है।
सत्यनारायण भगवान, भगवान विष्णु का ही एक रूप हैं — जो सत्य, धर्म और कल्याण के प्रतीक हैं। उनकी आरती करने से जीवन में सच्चाई, समृद्धि और शांति का वास होता है। जब भी सत्यनारायण भगवान् की कथा करते हैं तो कथा के बाद उनकी आरती अवश्य ही करनी चाहिए। सत्यनारायण की कथा और आरती करने से घर में धन-धान्य की वृद्धि, कलह का अंत और घर का वातावरण मंगलमय हो जाता है।
यह आरती पूरे परिवार के लिए शुभ फलदायी होती है।

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

रत्‍‌न जडि़त सिंहासन, अद्भुत छवि राजै।
नारद करत निराजन, घंटा ध्वनि बाजै॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

प्रकट भये कलि कारण, द्विज को दरस दियो ।
बूढ़ा ब्राह्मण बनकर, कंचन महल कियो ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

दुर्बल भील कठारो, जिन पर कृपा करी ।
चन्द्रचूड़ एक राजा, जिनकी विपत्ति हरी ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

वैश्य मनोरथ पायो, श्रद्धा तज दीन्हीं ।
सो फल भोग्यो प्रभुजी, फिर अस्तुति कीन्हीं ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

भाव भक्ति के कारण, छिन-छिन रूप धरयो ।
श्रद्धा धारण कीन्हीं, तिनको काज सरयो ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

ग्वाल-बाल सँग राजा, वन में भक्ति करी ।
मनवांछित फल दीन्हों, दीनदयालु हरी ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

चढ़त प्रसाद सवायो, कदलीफल, मेवा ।
धूप-दीप-तुलसी से, राजी सत्यदेवा ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा

श्री सत्यनारायण जी की आरती, जो कोई नर गावै ।
ऋद्धि-सिद्ध सुख-संपत्ति, जी भरके पावे ॥

ॐ जय लक्ष्मी रमणा, स्वामी जय लक्ष्मी रमणा।
सत्यनारायण स्वामी, सत्यनारायण स्वामी, जन पातक हरणा॥