नवरात्रि का पर्व, माँ दुर्गा के नौ रूपों की साधना और भक्ति का प्रतीक है। नवरात्रि के आठवें (अष्टमी) या नौवें (नवमी) दिन कन्या पूजन या कंजक पूजन का विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में माना गया है कि छोटी-छोटी कन्याएँ स्वयं माँ दुर्गा का स्वरूप होती हैं। इसलिए इनकी पूजा करने से माँ दुर्गा प्रसन्न होकर भक्तों को शक्ति, सुख और समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

कन्या पूजन का महत्व।

  • देवी स्वरूप – नन्हीं कन्याएँ नवदुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं।
  • आशीर्वाद की प्राप्ति – कन्या पूजन करने से माँ दुर्गा का विशेष आशीर्वाद मिलता है और जीवन की सभी बाधाएँ दूर होती हैं।
  • सांस्कृतिक परंपरा – यह हमारी संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है जो “नारी शक्ति” के सम्मान का संदेश देता है।
  • पुण्य की प्राप्ति – कन्या पूजन से भक्त अपने पापों से मुक्त होकर पुण्य अर्जित करता है।
  • घर में समृद्धि – इस पूजा से घर में सकारात्मक ऊर्जा, सुख-शांति और खुशहाली बनी रहती है।

कन्या पूजन की विधि।

  • पूजा की तैयारी – घर को साफ-सुथरा कर पूजास्थल को सजाएँ और माँ दुर्गा की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
  • कन्याओं को आमंत्रित करना – अष्टमी या नवमी के दिन 2, 5, 7 या 9 कन्याओं (उम्र 2 से 10 वर्ष) को आमंत्रित करें। कई जगह एक छोटा बालक (भैरव स्वरूप) भी पूजित किया जाता है।
  • पाँव धोकर पूजन – कन्याओं के चरण धोकर उन्हें आसन पर बैठाएँ, फिर तिलक करें और उनकी आरती उतारें।
  • भोग और प्रसाद – कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का प्रसाद परोसा जाता है।
  • उपहार और दक्षिणा – पूजा के बाद कन्याओं को चुनरी, कांच की चूड़ियाँ, फल, मिठाई या कोई उपहार व दक्षिणा देकर विदा करें।
  • आशीर्वाद लेना – अंत में कन्याओं को प्रणाम कर उनसे आशीर्वाद प्राप्त करें।

कन्या पूजन में ध्यान रखने योग्य बातें।

  • पूजा हमेशा श्रद्धा और सच्चे मन से करनी चाहिए।
  • कन्याओं को माँ का रूप मानकर उनका सम्मान करें।
  • भोजन शुद्ध और सात्विक होना चाहिए।
  • कन्याओं को प्रसन्न मन से विदा करें, यह सबसे बड़ा पुण्य है।

नवरात्रि में कन्या पूजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह नारी शक्ति और बेटियों के सम्मान का प्रतीक है। इस पूजा से माँ दुर्गा का आशीर्वाद प्राप्त होता है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि का संचार होता है।