श्री लक्ष्मी अष्टकम माता लक्ष्मी की स्तुति में रचित एक पवित्र स्तोत्र है। इसकी शुरुआत “नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते” से होती है। इस स्तोत्र में माता महालक्ष्मी की महिमा, शक्ति, करुणा और भक्तों पर उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

यहाँ पढ़ें श्री लक्ष्मी अष्टकम के संपूर्ण संस्कृत श्लोक हिंदी लिपि में। भक्त श्रद्धापूर्वक इसका पाठ शुक्रवार, दीपावली और माता लक्ष्मी की पूजा के शुभ अवसरों पर कर सकते हैं।

श्री लक्ष्मी अष्टकम के बोल (Maa Lakshmi Ashtakam)

॥ श्री लक्ष्म्यष्टकम् ॥

इन्द्र उवाच।

नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते।
शङ्खचक्रगदाहस्ते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ १॥

नमस्ते गरुडारूढे कोलासुरभयङ्करि।
सर्वपापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ २॥

सर्वज्ञे सर्ववरदे सर्वदुष्टभयङ्करि।
सर्वदुःखहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ३॥

सिद्धिबुद्धिप्रदे देवि भुक्तिमुक्तिप्रदायिनि।
मन्त्रमूर्ते सदा देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ४॥

आद्यन्तरहिते देवि आद्यशक्ति महेश्वरि।
योगजे योगसम्भूते महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ५॥

स्थूलसूक्ष्ममहारौद्रे महाशक्ति महोदरे।
महापापहरे देवि महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ६॥

पद्मासनस्थिते देवि परब्रह्मस्वरूपिणि।
परमेशि जगन्मातः महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ७॥

श्वेताम्बरधरे देवि नानालङ्कारभूषिते।
जगत्स्थिते जगन्मातः महालक्ष्मी नमोऽस्तु ते॥ ८॥

महालक्ष्म्यष्टकं स्तोत्रं यः पठेद्भक्तिमान्नरः।
सर्वसिद्धिमवाप्नोति राज्यं प्राप्नोति सर्वदा॥ ९॥

एककाले पठेन्नित्यं महापापविनाशनम्।
द्विकालं यः पठेन्नित्यं धनधान्यसमन्वितः॥ १०॥

त्रिकालं यः पठेन्नित्यं महाशत्रुविनाशनम्।
महालक्ष्मीर्भवेन्नित्यं प्रसन्ना वरदा शुभा॥ ११॥

॥ इति श्रीमहालक्ष्म्यष्टकस्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

श्री लक्ष्मी अष्टकम का महत्व

श्री लक्ष्मी अष्टकम माता महालक्ष्मी की महिमा का गुणगान करने वाला एक प्रसिद्ध स्तोत्र है। इसमें देवी को धन, समृद्धि, ज्ञान, शक्ति और मुक्ति प्रदान करने वाली जगतजननी के रूप में नमन किया गया है।

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धा और भक्ति से इस स्तोत्र का पाठ करना शुभ माना जाता है। भक्त विशेष रूप से शुक्रवार, दीपावली और लक्ष्मी पूजन के अवसर पर इसका पाठ करते हैं।

श्री लक्ष्मी अष्टकम से जुड़े प्रश्न (FAQs)

1. श्री लक्ष्मी अष्टकम क्या है?

श्री लक्ष्मी अष्टकम माता महालक्ष्मी की स्तुति में रचित एक संस्कृत स्तोत्र है। इसमें देवी की महिमा और उनकी कृपा का वर्णन किया गया है।

2. श्री लक्ष्मी अष्टकम की शुरुआत किन शब्दों से होती है?

इस स्तोत्र की शुरुआत “नमस्तेऽस्तु महामाये श्रीपीठे सुरपूजिते” से होती है।

3. श्री लक्ष्मी अष्टकम का पाठ कब करना चाहिए?

भक्त अपनी परंपरा के अनुसार शुक्रवार, दीपावली, लक्ष्मी पूजन और अन्य शुभ अवसरों पर इसका पाठ कर सकते हैं।

4. श्री लक्ष्मी अष्टकम में कितने श्लोक हैं?

श्री लक्ष्मी अष्टकम के मुख्य भाग में आठ श्लोक हैं। इनके बाद पाठ के फल का वर्णन करने वाले अतिरिक्त श्लोक भी प्रचलित पाठ में मिलते हैं।

5. श्री लक्ष्मी अष्टकम का पाठ करने का क्या महत्व है?

धार्मिक मान्यता के अनुसार, श्रद्धापूर्वक श्री लक्ष्मी अष्टकम का पाठ माता महालक्ष्मी के प्रति भक्ति और समर्पण व्यक्त करने का एक माध्यम है। भक्त सुख, शांति और समृद्धि की कामना से इसका पाठ करते हैं।