करवा चौथ की पूजा में व्रत कथा सुनने के बाद करवा माता की आरती की जाती है। श्रद्धा से गाई गई यह आरती व्रत को पूर्णता देती है और मन में शांति और भक्ति का भाव जगाती है। यहाँ पढ़ें करवा माता की आरती हिंदी में।

श्री करवा माता की आरती

ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

सब जग की हो माता, तुम हो रुद्राणी।
यश तुम्हारा गावत, जग के सब प्राणी॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

कार्तिक कृष्ण चतुर्थी, जो नारी व्रत करती।
दीर्घायु पति होवे, दुख सारे हरती॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

होए सुहागिन नारी, सुख संपत्ति पावे।
गणपति जी बड़े दयालु, विघ्न सभी नाशे॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

करवा मैया की आरती, व्रत कर जो गावे।
व्रत हो जाता पूरन, सब विधि सुख पावे॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

ॐ जय करवा मैया, माता जय करवा मैया।
जो व्रत करे तुम्हारा, पार करो नइया॥
॥ ॐ जय करवा मैया ॥

करवा माता की कृपा आप पर और आपके परिवार पर सदा बनी रहे। आपके जीवन में प्रेम, सुख और सौभाग्य बना रहे, और आपके जीवनसाथी को दीर्घायु और स्वस्थ जीवन मिले। आप सभी को करवा चौथ की हार्दिक शुभकामनाएँ।

॥ जय करवा माता ॥

करवा चौथ आरती से जुड़े FAQs

1. करवा चौथ की आरती कब की जाती है?

आरती शाम को पूजा के समय, व्रत कथा सुनने के बाद और चंद्रोदय से पहले की जाती है।

2. करवा चौथ की मुख्य आरती कौन-सी है?

करवा माता की आरती “ॐ जय करवा मैया” करवा चौथ की मुख्य आरती मानी जाती है। इसके साथ गणेश जी और शिव-पार्वती की आरती भी की जाती है।

3. क्या आरती अकेले भी की जा सकती है?

हाँ, श्रद्धा से अकेले भी आरती की जा सकती है। परंपरा में परिवार और आसपास की महिलाएँ मिलकर पूजा और आरती करती हैं।

4. आरती के लिए कौन-सा दीपक जलाना चाहिए?

आमतौर पर घी का दीपक शुभ माना जाता है। घी न हो तो तेल का दीपक भी जलाया जा सकता है।

5. क्या आरती गाना ज़रूरी है?

आरती गाकर करना श्रेष्ठ माना जाता है, पर श्रद्धा सबसे ज़रूरी है। गाना संभव न हो तो मन में स्मरण करके भी आरती की जा सकती है।

6. आरती के बाद क्या करना चाहिए?

आरती के बाद प्रसाद बाँटें, बड़ों का आशीर्वाद लें और चंद्रोदय की प्रतीक्षा करें। चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद ही व्रत खोलें।