महाशिवरात्रि हिंदू धर्म का एक अत्यंत पवित्र और आध्यात्मिक पर्व है। यह पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है और फाल्गुन मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। “महाशिवरात्रि” का अर्थ है — शिव की महान रात्रि। यह पर्व केवल पूजा का नहीं, बल्कि आत्मचिंतन, संयम और भक्ति का प्रतीक माना जाता है।
महाशिवरात्रि क्यों मनाई जाती है?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार:
- इसी दिन भगवान शिव और माता पार्वती का विवाह हुआ
- इसी रात्रि भगवान शिव ने तांडव किया
- शिव को यह रात्रि विशेष प्रिय मानी जाती है
महाशिवरात्रि की रात्रि को जागरण और ध्यान के लिए श्रेष्ठ माना गया है, क्योंकि इस समय वातावरण शांत और सकारात्मक रहता है।
महाशिवरात्रि व्रत के नियम
महाशिवरात्रि पर व्रत रखना श्रद्धा का विषय है, बाध्यता नहीं। व्रत का मुख्य उद्देश्य मन की शुद्धता है, केवल भूखा रहना नहीं। सामान्य नियम:
- सात्विक भोजन करें
- दिन में एक बार फलाहार या निर्जल व्रत
- झूठ, क्रोध और नकारात्मक विचारों से दूर रहें
- रात में शिव भजन या मंत्र जप करें
महाशिवरात्रि की पूजा विधि
महाशिवरात्रि की पूजा घर पर भी सरलता से की जा सकती है।
पूजा विधि:
- प्रातः स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें
- शिवलिंग पर जल या दूध अर्पित करें
- बेलपत्र, धतूरा या पुष्प चढ़ाएँ
- दीपक और धूप जलाएँ
- शिव मंत्र का जप करें
- श्रद्धा से आरती करें
बेलपत्र चढ़ाना शिव पूजा में विशेष महत्व रखता है।
महाशिवरात्रि पर जप करने योग्य मंत्र
महाशिवरात्रि पर मंत्र जप मन को स्थिर और शांत करता है। नीचे दिए गए मंत्र सरल और सुरक्षित हैं। दिए गए मंत्र का 11, 21 या 108 बार जप करें।
1. पंचाक्षरी शिव मंत्र (सबसे प्रसिद्ध)
मंत्र:
ॐ नमः शिवाय॥
2. शिव गायत्री मंत्र
मंत्र:
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे।
महादेवाय धीमहि।
तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
3. सरल शिव स्मरण मंत्र
मंत्र:
ॐ नमः शिवाय नमः॥
2026 में महाशिवरात्रि कब है?
📅 महाशिवरात्रि 2026
➡️ 15 फरवरी 2026 (रविवार)
(तिथि स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ी बदल सकती है)
महाशिवरात्रि से जुड़े धार्मिक व आध्यात्मिक प्रश्न (FAQ)
महाशिवरात्रि वह दिव्य रात्रि है जब भगवान शिव तांडव और ध्यान में लीन रहते हैं। मान्यता है कि इस रात शिव तत्व पृथ्वी पर विशेष रूप से सक्रिय होता है, जिससे साधक को आत्मशुद्धि, शांति और मोक्ष की अनुभूति होती है।
बेलपत्र के तीन पत्ते त्रिदेव (ब्रह्मा, विष्णु, महेश) और सत्व-रज-तम तीन गुणों का प्रतीक माने जाते हैं। बेलपत्र अर्पित करने से अहंकार का त्याग और शुद्ध भाव से भक्ति की भावना जागृत होती है।
जल मन की शांति और पवित्रता का प्रतीक है, जबकि दूध सात्विकता और शुद्ध भाव को दर्शाता है। शिवलिंग पर इनका अभिषेक करने से मन के विकार शांत होते हैं और आत्मा शुद्ध होती है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस रात जागरण करने से साधक का मन सांसारिक मोह से ऊपर उठता है। जागरण का अर्थ केवल जागना नहीं, बल्कि चेतना को जागृत करना है।
हाँ, भगवान शिव गृहस्थों के भी आराध्य हैं। श्रद्धा, संयम और सच्चे भाव से किया गया व्रत और पूजन गृहस्थ जीवन में भी शांति और संतुलन लाता है।
